•                                मेरा बचपन



     जिस उम्र में किया ढेर सारा फन,
     जिस उम्र में चंचल था मन,
     अरे अरे यही तो था मेरा बचपन.

     मम्मी बोले उठ बेटा जाना है स्कूल
     उठते ही याद आया होमवर्क करना गया भूल,
     तब अचानक याद आई मास्टर जी की मार
     डर के कारण आ गया मुझे झूठा बुखार
     तब मम्मी ने मेरे प्रति दिखाया अपना प्यार
     निकाला चम्मच और पिलाई मुगली घुट्टी
     हंसकर बोली सोजा बेटा आजकल करले छुट्टी.

     माता पिता की आज्ञा की
     करता था अवहेलना
     एक ही मकसद
     दिन-रात खेलना
     ना दिखती थी धूप
     ना दिखती थी छाव
     घर पर नहीं टिकते थे मेरे पांव
     चल पड़ता मैं हाथ में गेंद
     और कंधे पर लेकर बल्ला
     जब इकट्ठी हो जाए मेरी टोली
     स्वयं मच जाता था गली मे हल्ला
     पता नहीं क्या थी खुजली
     मेरे फरियाद लेकर घर पहुंच गया पूरा मोहल्ला
     एक तरफ पापा का गुस्सा
     दूसरी तरफ मम्मी की अनुपस्थिति मे मैं पड़ गया अकेला
     चारदीवारी के भीतर पापा ने मुझको खूब पेला
     मुझे ही है पता मैंने कितना दर्द झेला
     हम भी थे जिद्दी
    अगले दिन उसी जगह जाकर दोबारा खेला
     जिस उम्र में किया ढेर सारा फन
     जिस उम्र में चंचल था मन
     अरे अरे  यही तो था मेरा बचपन.

    जितेन्द्र

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    6 comments:

    1. Gajab bhai poore bachpan ki yad dila di bhai toone👌👌👌👌☺️☺️☺️☺️

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    2. कविता इन रैप फॉर्मेट. बहुत खूब... पढ़कर अच्छा लगा.

      ऐसे ही लिखता रह...❤❤

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    3. love you jeetu 😍😍😋...bhut bdhiya

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    4. वाह! भाई जीतू तुस्सी ते छा गए....

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